PANIPAT AAJKAL : श्री प्रेम मन्दिर पानीपत का 106 वां वार्षिक प्रेमसम्मेलन परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री मदन मोहन जी हरमिलापी महाराज परमाध्यक्ष श्री हरमिलाप मिशन हरिद्वार की अध्यक्षता में एवं श्री प्रेम मन्दिर पानीपत की परमाध्यक्षा परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता दवी जी महाराज के सानिध्य में चल रहे प्रेम सम्मेलन कै तीसरे दिन श्री वांके विहारी नाम प्रचार समिति पानीपत की मण्डली के अध्यक्ष गुलशन गुप्ता ने मधुर संगीत के साथ भजन व संकीर्तन में उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इसी कड़ी के प्रसंग में गुलशन गुप्ता ने कहा कि श्रीराम जी ने वनवास जाने के समय भैय्या लक्ष्मण से कहा कि वनगमन से पहले माता सुमित्रा से आज्ञा लेकर आओ। जव लक्षमण जी आज्ञा लेने गये तो माता ने कहा कि जहां राम हैं तुम्हारे लिए अयोध्या वहीं है और यदि राम वन में हैं तो तुम स्वप्न में भी अयोध्या का ध्यान मत करना। इसीलिए लक्ष्मण जी वनवास के मध्य एक दिन भी नहीं सोए। लक्ष्मण मूर्छा तो केवल एक वहाना था। राम चाहते थे इस वहाने लक्ष्मण कुछ आराम कर ले।
श्री अवध धाम मन्दिर पानीपत से पधारे श्री राधे राधे जी महाराज ने वताया कि संत सेवा के लिए कैसे एक भक्त ने चोरी भी की और यहां तक कि राजा की घोषणा के बाद सन्त सेवा के लिए डाकू बने तथा उसी श्रृंखला में उनको भगवान के दर्शन भी प्राप्त हुए ।अयोध्या धाम से पधारे श्री राधेश्याम जी रामायणी जी ने रामचरितमानस की चौपाइयों के साथ कीर्तन भी करवाया।
हरिद्वार से पधारे श्री जगन्नाथ धाम के महामण्डलेश्वर परम पूज्य स्वामी अरूणदास जी ने गुरूमहिमा गाई। साथ में सन्देश भी दिया कि केवल कथा सुनने से उतना लाभ नहीं होगा जब तक हम उस पर मनन के साथ अपने आचरण में नहीं लाते ।
आज सत्र के समापन पर पानीपत की परमाध्यक्षा पूज्या कान्तादेवी जी महाराज ने भी गुरूदेव प्रथम की महिमा बताई कि यह सम्मेलन इसीलिए किये जाते हैं कि सन्तों के दर्शन व उनके विचार प्राप्त होते रहें जिससे कि जीवन सही मार्ग पर चल सके ।